
वर्तमान में वैश्विक राजनीति एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर खड़ी है। 2 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने देश को संबोधित करने वाले हैं। पूरी दुनिया की नज़रें इस भाषण पर टिकी हैं क्योंकि यह माना जा रहा है कि ट्रंप या तो ईरान के साथ चल रहे इस भीषण युद्ध से पीछे हटने का एलान करेंगे या फिर अपने देश के भीतर उठ रहे विरोध के स्वरों का कड़ा जवाब देंगे।
ईरान की कड़ी चुनौती और युद्ध का स्वरूप:
अमेरिका और इजरायल ने अनुमान लगाया था कि यह युद्ध मात्र 1 या 2 हफ्तों में समाप्त हो जाएगा, लेकिन ईरान ने उनकी इस सोच को गलत साबित कर दिया है। ईरान पिछले 25 सालों से युद्ध की तैयारी कर रहा था, यही कारण है कि वह आज अमेरिका और इजरायल जैसी महाशक्तियों को कड़ी टक्कर दे रहा है।
हमले और जवाबी कार्रवाई:
युद्ध की विभीषिका अब रिहायशी और सार्वजनिक इलाकों तक पहुँच गई है:
- तेहरान में तबाही: ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल ने तेहरान की यूनिवर्सिटी और सबसे बड़े वॉटर प्लांट (जल संयंत्र) को तबाह कर दिया है, जिससे आम जनता के लिए संकट खड़ा हो गया है।
- इजरायल पर पलटवार: जवाब में ईरान ने इजरायल के प्रमुख शहर ‘तेल-अवीव’ पर अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला किया है। इस हमले में इजरायल के बिजली ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया गया, जिससे पूरे तेल-अवीव में बिजली की आपूर्ति ठप हो गई है।
विश्व युद्ध का खतरा और रूस की भूमिका:
जैसे-जैसे यह संघर्ष लंबा खिंच रहा है, दुनिया में ‘तीसरे विश्व युद्ध’ (World War 3) की आहट सुनाई देने लगी है। एक तरफ अमेरिका यूक्रेन को अपना समर्थन बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ रूस ने अब खुलकर ईरान का साथ देना शुरू कर दिया है। शक्तियों का यह ध्रुवीकरण पूरी दुनिया को विनाश की ओर ले जा सकता है।
आर्थिक प्रभाव:
इस युद्ध का असर केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। ईरान ने अभी तक ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़’ (Strait of Hormuz) पर अपनी पाबंदियां नहीं हटाई हैं। इस वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (OIL) की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई और आर्थिक संकट का खतरा बढ़ गया है।
निष्कर्ष:
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आगामी संबोधन यह तय करेगा कि दुनिया शांति की ओर बढ़ेगी या एक और बड़े महायुद्ध की आग में झुलसेगी।






